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गुरिल्ला युद्द के अविष्कारक थे शिवाजी महाराज

  गुरिल्ला युद्द के अविष्कारक थे शिवाजी महाराज शिवजी महाराज ने 1674 ई. में पश्चिम भारत में मराठा साम्राज्य की नींव रखी। इसके लिए उन्होंने मुगल साम्राज्य के शासक औरंगज़ेब से संघर्ष किया। सन् 1674 में रायगढ़ में उनका राज्याभिषेक हुआ और वह "छत्रपति" बने। छत्रपती शिवाजी महाराज ने अपनी अनुशासित सेना एवं सुसंगठित प्रशासनिक इकाइयों कि सहायता से एक योग्य एवं प्रगतिशील प्रशासन प्रदान किया। उन्होंने प्राचीन हिन्दू राजनीतिक प्रथाओं तथा दरबारी शिष्टाचारों को पुनर्जीवित किया और मराठी एवं संस्कृत को राजकाज की भाषा बनाया। वे भारतीय स्वाधीनता संग्राम में नायक के रूप में स्मरण किए जाने लगे। बाल गंगाधर तिलक ने राष्ट्रीयता की भावना के विकास के लिए शिवाजी जन्मोत्सव की शुरुआत की। उन्होंने समर-विद्या में अनेक नवाचार किए तथा छापामार युद्ध की नयी शैली (शिवसूत्र) विकसित की। शिवाजी महाराज ने सबसे पहले गुरिल्ला युद्द की शुरू वात की थी ये के तरह का छापामार युद्द होता है। गुरिल्ला युद्द से सीख कर विएतनामिओ ने अमरीका से जंग जीत ली थी। गुरिल्ला युद्द अर्धसैनिक बलों द्वारा सैनिक टुकड़ीयों पर पीछे या पार्...
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भगवा पताका फहराई वीर शिवाजी नाम

  भगवा पताका फहराई वीर शिवाजी नाम भारत भूमि पे पैदा हुवा जिनको है वीर शिवाजी  नाम , अच्छा अच्छा तीस मारखाँ को कर दियो काम तमाम। भगवा भारत भगवा भूमि पर भगवा पताका फेहरायी एक मराठा सो पे भारी ,या  बात मुगलो के समझायी , भारत भूमि है हिन्द के लालो की,शंखनाद की जिनने  , पूर्ण स्वराज के खातिर , बलिदान होना सिखाया जिन ने , नाक में दम कार्यो  मुगलो का ,जब हर हर महादेव कहा भारत माता के इस शेर ने ,कभी अन्याय कोई नहीं सहा , नारी और सब धर्मो  का करता था  वी  सम्मान सदा , वीर शिवाजी बहादुरों पर अभिमान करता था  सदा , भाले बरछी तीर तलवार उनके लिए खिलौना था  , बड़े बड़े योद्धा भी रण में उनके लिए तो बौना था  , मित्रता करता अच्छे लोग से, उनको पूरा सम्मान देता दोगले दुश्मन का छुपि के  परमधाम का धाम देता। अफजल खान का  बेटा के पेट में बगनखा घुसाई के दी बुद्धिमत्ता, युद्ध कौशल से मराठा साम्राज्य के  ज्योत दी , भारत देश में नौ सेना का सबसे पहले निर्माण  हुवो मुग़ल साम्राज्य का जाबाजी से पुरो काम तमाम हुवो। राजेश भंडारी "बाबू " मालवी साहित...

मातृभाषा दिवस पर विशेष : गोंडी के साथ मालवी को भी बनाये राजभाषा

 मातृभाषा दिवस पर विशेष गोंडी के साथ मालवी को  भी बनाये राजभाषा गोंडी भाषा को राजभाषा का दर्जा माननीय मुख्यमंत्री जी ने देने की हाल ही में घोषणा 2018 में की है उसी के सन्दर्भ हम मालवा के  मालवी बोलने लिखने वाले लोग पुरे प्रदेश और आधे राजस्थान में है  और करीब २ करोड़ लोग मालवी बोलते लिखते है  ये आकडे के सर्वे में आ चुके है  | हमारी सरकार ने कोई सर्वे इस तरह का नहीं करवाया है  पर यूनिस्को के आकड़े पूरी तरह से प्रमाणित है  | यूनिस्को ने ही "मालवी " को  समजने की कोशिस की है  जो  की विश्व की     भाषाओ  पर काम कर रही  है   मालवी को समजा ,सर्वे करवाए और अमेरिका से आकर चंदुखेडी जैसे  गांव  में जाकर   डाटा इकठा किया | सर्वे रिपोर्ट  कहती है  की शहरो से २ किलो मीटर के अन्दर हर जगह है  वहां  "मालवी" ही   चलती है  | शहरो में तथाकथित पड़े लिखे   लोगो ने "मालवी " को   ग्रामीण भाषा समझने की भूल की है  |जिससे एक भाषा की दिवार शहरों औ...

मात पिता सेवा दिवस के रूप में मनाइये

 मात पिता सेवा दिवस के रूप में मनाइये संस्कारो को विदेशी रिवाजो में ना बाँटिये, मर्यादा भूलकर पश्चिम के तलवे न चाटिये, हिन्द के हर त्यौहार का विज्ञान है आधार, युगो पुराणी सभ्यता को ऐसे ना  पाटिये। रोज डे हग दे क्या  यही है प्यार का आगाज लालच से कभी नहीं चढ़ती मुहब्बत परवाज दिखावे का प्यार , मतलबी है बाजारू त्यौहार , प्रेयसी और प्रेमी नहीं किसी दिन के मोहताज। भेंट देने से  बनते है नकली तथाकथित रिश्ते उनको आशीष नहीं देते ऊपर से फ़रिश्ते प्रेम तो ईश्वर की आराधना सा पवित्र होता है रिश्तो को बना दिया है बाजारवाद ने सस्ते। इस विदेशी षड्यंत्र की इस तरह से झुकाइये   मात पिता सेवा दिवस के रूप में मनाइये धोइये चरण अपने माता पिता के इस दिन अपने संस्कारो को अपने बच्चो को सिखाइये। राजेश भंडारी "बाबू " मालवी साहित्यकार व् कवि

मालवा में बसंत गीत

“हुवा हुवा”

“हुवा हुवा” जब मालवा में ज्वार के सरर सरर करते हुए खेत हुवा करते थे तब जब खेत में कोई तेंदुआ घुस जाता था तो किसान लोग खेत के चारो और खड़े होकर के जोर जोर से “हुवा हुवा “ चिल्लाते थे और चारो ओर से आवाज आती देखकर तेंदुआ घबराकर बाहर की और खेत से निकल कर भागते थे और कुछ तेंदुआ के शिकार करने वाले उनका शिकार भी कर लेते थे | पिछले दो दिन से मेरे  पापा(जिन्होंने खेती का काम कर रखा है ) जिनको थोडा कम सुनाई देता है मुझसे पूछ रहे है कि ये टीवी में “हुवा हुवा “ की आवाज क्यों आ रही है ? कही मोहल्ले में तेंदुआ तो नहीं घुस गया | मैंने कहा कि ये दिल्ली में बैठे हुवे कुछ तथाकथित जननायक लोग अपने खेत को खाली करवाने में लगे है और  “हुवा हुवा “ का खेल खेल रहे है कुछ अच्छा हो गया तो हमारे कारण हुवा और कुछ बुरा हुवा तो “हुवा तो हुवा” करके हाथ लहरा दिया | राजनिति में एक  बात है जो मजे देती हे की कुछ भी हो अपनी जिम्मेदारी में मत लो तुरंत खारिज कर दो और कभी कोई पूछ ही ले तो कह दो “हुवा तो हुवा” | सामने सबुत हो पर सरकार तो अपनी हे  केस ही दर्ज नहीं होने देंगे और कोई करने आया तो...

व्यंग:पट्ठे के गले में दुपट्टा